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चित्र आधारित रचनाएँ - टास्क रचना दीक्षित

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रचना दीक्षित द्वारा दिए गए टास्क में चित्र पर आधारित कोई रचना लिखने को कहा गया था।  इस चित्र पर समूह में विविध प्रकार की रचनाएँ लिखीं गईं। प्रस्तुत हैं वे सभी रचनाएँ।  1. दीवारों के भी कान होते हैं, ये मात्र एक कहावत है या एक महत्पूर्ण संदेश भी हम  सबके लिए है। महाभारत युद्ध के बाद श्रीकृष्ण से द्रौपदी ने रोकर पूछा..हे सखा, इतना संहार, इतनी हानि, अपने पुत्रों को भी मैं गवां बैठी, मेरा अपराध क्या इतना बड़ा था? मुझे ऐसा फल क्यों प्राप्त हुआ? तब श्रीकृष्ण ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से तो अनुचित कर्म नहीं पर वाणी के माध्यम से किया गया तुम्हारा कर्म  तुम्हें इतनी पीड़ा दे गया। वाणी भी कर्म ही है ,तुम थोड़ा भी नियंत्रण अपनी वाणी पर रखती तो कदाचित् परिणाम इतना भयंकर ना होता। पसरे मौन को द्रौपदी का करुण रुदन चीर रहा था। सच, ये वाणी की करामात है, कोई घृणित निंदा, विषैली अनुपयोगी गोपनीय बात, मुख से निकालनी क्या अत्यावश्यक है? दीवारों के कान वाली बात कहने की है, वस्तुतः किसी अन्य के द्वारा सुने जाने का भय भी तो है, वो जो वाणी में निहित गोपनीय बात का अनुचित लाभ भी ...

संगीत मन शांत करता है - 2

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 ''गायें गुनगुनगुनाएँ शौक से'' क्या है? यह समूह कब और कैसे बना ? और इसकी नींव किसने रखी ? आइये, आज विस्तार से जानते हैं इस ग्रुप के विषय में।   कोई चार पांच साल पुरानी  बात है, एक दिन ( ठीक ठीक 3 अप्रैल 2017 ) को फेसबुक पर अर्चना चावजी की पोस्ट देखने को मिली थी कि वे एक गाने का व्हाट्सप्प समूह बनाने का सोच रही हैं जहाँ सिर्फ स्त्रियाँ ही होंगी। यहाँ देखिये उनका प्रस्ताव।   https://www.facebook.com/ archana.chaoji/posts/ 10209112120502378   इस पोस्ट को देख मन प्रसन्न हो गया और तत्काल कुछ और लोगों के अलावा हमने भी उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और उनकी मंडली में शामिल हो गए।  हमारे साथ ही समान रूचि वाली कई अन्य ब्लॉगर मित्र भी थीं वहां। कुछ नियम बने, कुछ कानून और इस छोटे से कारवां में इस तरह गाने गुनगुनाने का सिलसिला चल निकला।    देखिये इस ग्रुप के निर्माण के सम्बन्ध में अर्चना चावजी ने क्या कहा -  शुरुआत वंदना और मेरी गीत भेजो सुनाओ से ही हुई थी।   मैने कोई गीत व्हाट्सएप पर भेजा सुनने को फिर उन्होंने भेजा फिर मैने ...

परिंदे व दीवारें - कविमन की बगिया में

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  गाएँ गुनगुनाएँ समूह में हर सप्ताह मिले टास्कों से समूह की नियमितता बनी रहती है| कभी कभी गीतों के अतिरिक्त कुछ टास्क अलग हटकर मिल जाते तो उन्हें सहेज लेने को जी चाहता है| ऐसा ही एक टास्क ग्रुप में लम्बे समय पश्चात् पुनः जुड़ कर सक्रिय हुई सदस्या शीतल माहेश्वरी ने दिया| उन्होंने एक चित्र दिया जिस पर सभी को अपने भाव व्यक्त करने थे| एक ही चित्र पर भावों ने कैसे कैसे रंग बदले, यह देखना अभूतपूर्व रहा| इस पोस्ट में पहले वही चित्र दे रही हूँ| उसके बाद रचनाकारों की कविताएँ होंगी| रचनाकारों का क्रम अभिव्यक्ति आने के क्रम के अनुसार रखा गया है| सर्वप्रथम शीतल द्वारा दिया गया चित्र देखें| टास्क का चित्र शीतल माहेश्वरी शामिल कवयित्रियाँ-- 1.रचना दीक्षित जी 2.ऋता शेखर 3.शोभना चौरे दी 4.प्रतिभा द्विवेदी जी 5.साधना वैद दी 6.अंजू गुप्ता तितली जी 7.रश्मिप्रभा दी 8. उषा किरण दी 9. गिरिजा कुलश्रेष्ठ दी 10. संध्या शर्मा जी 11. अर्चना चाव जी 12. पूजा अनिल ========================= ========================= 1. रचना दीक्षित    तन्हाई    कभी फुर्सत में देखती हूँ     अपने...

संगीत मन शांत करता है

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  हमारे पास इस ग्रुप से जुडी बहुत सारी स्मृतियाँ हैं, उनमें से कुछ को यहाँ संकलित कर रहे हैं।  संगीत न सिर्फ मन शांत करता है बल्कि स्वास्थ्य बनाये रखने में मदद भी करता है, निरोग करता है।  हम सब जो इस सफर में साथ चले, संगीत के सहारे ही चल रहे हैं अभी भी।   (04-04-2017) अर्चना चावजी ने एक फेसबुक पोस्ट बनाई थी इसी बात पर -  संगीत को हमेशा उपचार की तरह लिया है और हमेशा स्वस्थ महसूस किया खुद को ...धन्यवाद शौकिया गीत गाने वालों को .. https://www.facebook.com/ archana.chaoji/posts/ 10209121692541673  इसके बाद अर्चना चावजी की और एक पोस्ट थी जिसमें पहले दो तीन दिन की गतिविधि का ज़िक्र था। 6 अप्रैल 2017 की यह पोस्ट देखिये -  ग्रुप रिपोर्ट- पिछले दिनों शौकिया गाने वालों का ग्रुप बनाया - ' गाएं गुनगुनाएं शौक से' शुरुआत में 25सदस्यों ने सदस्यता ली 3 वापस चले गए,कारण मोबाईल का हैंग हो जाना रहा शायद । Sangita Asthana जी बहुत ही मधुर आवाज की धनी हैं ,क्यों लौट गई,पता नहीं चला अभी 21 सदस्य हैं ,उनमें 3या4 सदस्यों ने अब तक कोई गीत नहीं सुनाया है। 2 सदस्य अति ...