संगीत मन शांत करता है
हमारे पास इस ग्रुप से जुडी बहुत सारी स्मृतियाँ हैं, उनमें से कुछ को यहाँ संकलित कर रहे हैं। संगीत न सिर्फ मन शांत करता है बल्कि स्वास्थ्य बनाये रखने में मदद भी करता है, निरोग करता है। हम सब जो इस सफर में साथ चले, संगीत के सहारे ही चल रहे हैं अभी भी।
(04-04-2017) अर्चना चावजी ने एक फेसबुक पोस्ट बनाई थी इसी बात पर -
संगीत को हमेशा उपचार की तरह लिया है और हमेशा स्वस्थ महसूस किया खुद को ...धन्यवाद शौकिया गीत गाने वालों को ..
इसके बाद अर्चना चावजी की और एक पोस्ट थी जिसमें पहले दो तीन दिन की गतिविधि का ज़िक्र था। 6 अप्रैल 2017 की यह पोस्ट देखिये -
ग्रुप रिपोर्ट-
पिछले दिनों शौकिया गाने वालों का ग्रुप बनाया - '
गाएं गुनगुनाएं शौक से'
शुरुआत में 25सदस्यों ने सदस्यता ली 3 वापस चले गए,कारण मोबाईल का हैंग हो जाना रहा शायद ।
Sangita Asthana
जी बहुत ही मधुर आवाज की धनी हैं ,क्यों लौट गई,पता नहीं चला अभी 21 सदस्य हैं ,उनमें 3या4 सदस्यों ने अब तक कोई गीत नहीं सुनाया है। 2 सदस्य अति उत्साहित प्रदर्शन कर रहे हैं,5-6 हौसला बढ़ाते हैं,खिंचाई करते हैं, जो एक एक गीत सुना गए ,उनके तैयारी से आने की उम्मीद है।
...अब तक पुराने से लेकर नए सभी तरह के गीत सुनाए जा चुके हैं
कुल मिलाकर अच्छा और मजेदार अनुभव!
आभार -
Kavita Verma
आराधना तिवारी
Seema Srivastava
आगे की पोस्ट सीधे वहीँ पढ़ सकते हैं।
https://www.facebook.com/archana.chaoji/posts/10209134931552640
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अर्चना चावजी तब खूब मजे ले कर गीत गातीं थीं और उसके बारे में बतातीं भी थीं. यह पोस्ट सबूत है उसका। हम सब उनकी छत्र छाया में खुल कर गाने लगे।
ग्रुप रिपोर्ट - गाएं,गुनगुनाएं शौक से
अब तक कुल 75 से भी ज्यादा गीत/ग़ज़ल/भजन शौक से गाये जा चुके हैं.

शौकिया गाने वालों के ग्रुप में



उसमें बच्चों से लेकर बड़ों के लिए लोरी से लेकर लैला लैला तक 

गपशप भी होती है ।
मजेदार बात ये कि देश के कई अलग अलग शहरों की गायिकाओं में कोई नाती-पोते वाली दादी-नानी हैं तो किसी की गोद में 1-3 साल के बच्चे हैं .
कोई रसोई में नाश्ता बनाते हुए गा रहा है ,तो कोई खाते हुए ,कोई सोते समय भी गा रहा है। सब खुश हैं, कामकाज के तनाव से मुक्त ...अपने काम भी निपटा रहे हैं ,कोई गला खराब होने पर भी गा रही हैं तो कोई गाकर गला खोल रही हैं ।
कुछ गीत और उनकी नकली गायिका अर्चना
आपकी इनायतें आपके करम
दिल आज शायर है ग़म आज नगमा है
काँटों से खींच के ये आँचल
इन आँखों की मस्ती के
सलामे इश्क मेरी जां
मूंगड़ा मूंगड़ा
हमने देखी है उन आँखों की
ये समां
सुनो छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी
मेरी तमन्नाओं की तकदीर
ये कैसा सुर मंदिर है
बोले रे पपीहरा .....और ...और ....बाकि सब भी अपने अपने बताएंगे ....
फेसबुक पर यहाँ देखिये इसे
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धन्यवाद।
पूजा अनिल
Comments
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