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भिंडी एक रेसिपी अनेक

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आज का टास्क पूजा अनिल ने दिया..सबसे भिंडी की सब्जी के तरीके पूछे..अब आप सब भी बनाकर टेस्ट स्वाद लीजिए...गाएं गुनगुनाए के साथ खाएं और खिलाएं.... 1) पूजा अनिल - A....मेरी आलू भिंडी प्याज़ की सब्जी की रेसिपी  1. आधा किलो भिंडी धोकर सुखाकर छोटे टुकड़ों में काटकर कढ़ाही में तेज आंच पर कच्चा सा  तल लें। कच्ची तली भिंडी निकाल कर एक तरफ रख दें।  2.  2- 3 आलू छीलकर धोकर छोटे क्यूब्स में काट लें। 2-3 प्याज़ छीलकर मोटे मोटे काट लें। 2-3 टमाटर धोकर मोटा काट लें। हरी मिर्च भी काट कर रखें।   एक बड़ी कढ़ाही में तो चम्मच तेल गर्म करें, उसमें आलू के क्यूब्स दाल कर कुछ देर मध्यम आंच पर पकाएं, पूरा गलने की आवश्यकता नहीं है।  3. इसमें कटा हुआ प्याज़ और टमाटर डालें। सब कुछ को मिला लें और दो मिनट पकाएं।  4. अब कटी हरी मिर्च, नमक, पीसा धनिया, पीसा जीरा, लाल मिर्च डाल कर अच्छे से मिला लें। इसे 3-4  मिनट पकाएं।  5. अब इसमें कच्ची तली भिंडी भी मिला लें और आधा ग्लास पानी डाल कर 15 मिनट ढक कर पकाएं।  बीच बीच में चलाते रहें ताकि सब्जी तले में न चिपके।...

मन्नतों के ताले💞

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मन्नत मांगने के सबके अपने तरीके हैं। हम प्रसाद बोलते हैं, हे भोलेनाथ मनोकामना पूरी कर दो सवा रूपये ( अब तो रेट बढ़ गए हैं महंगाई के साथ) का प्रसाद चढ़ायेंगे। मजार, मन्दिर व पेड़ों पर भी मन्नतों के धागे बाँधे जाते हैं। विदेशों में देखा पुलों पर मन्नतों के ताले बाँधते हैं लोग। उन तालों पर कई बार प्रेमी युगल के दिल और नाम अंकित होते हैं । कई बार बच्चों की सूदर या कोई वस्तु साथ में लॉक कर चाबी नीचे नदी में फेंक देते हैं। कैसा विश्वास है कि नदी अपने हृदय में सब संजो लेगी और पुल के साथ प्रार्थना करेगी। नदी के दो किनारे जो कभी नहीं मिलते, परन्तु उनको जोड़ देता है एक पुल।ये कैसा अजीब सा रिश्ता है प्यार का कि एक दूसरे से अनजान, कई बार तो अलग-अलग देशों व संस्कृतियों के लोग एक हो जाते हैं, जन्म- जन्मान्तरों तक साथ निभाने की कसमें खाते हैं ।ज़्यादातर ये ताले दो प्रेमी ही लगाते हैं। कई बार इन लव- लॉक्स का वजन इतना ज़्यादा हो जाता है कि इनमें से कई तालों को तोड़कर हटाना पड़ता है।  दो इंसानों की परिस्थितियाँ चाहें कितनी ही विकट या विपरीत हों, प्यार दो दिलों पर पुल बना कर उनको एक कर देता है और भाव...

माँ को पत्र लिखा - टास्क पूजा अनिल

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पूजा   अनिल   के दिए टास्क में सबने अपनी   माँ को पत्र लिखा और खूब याद किया , सबके पत्र पढ़ते पढ़ते खूब बार आँखें भर आई। माँ जैसा कोई नहीं , आप भी पढ़िए -       माँ तो है माँ ......     मेरी भोली माँ   बहुत सारे वाले प्यार के साथ आपको ढेर सारी जफ्फियां   ## मेरी शादी के डेढ़ साल बाद ही मुझे घर से रुख्सत कर तुम जहां से रुख्सत हो ली ,, होली के ठीक एक सप्ताह बाद ,.... ये कैसी विदाई थी   माँ ? औऱ मेरे लिए तो इस डेड साल के भी 9 महीने ही मिले क्योंकि जानू की प्रेग्नेंसी के चलते , ससुराल की उस परम्परा का निर्वाह भी तो किया कि   इस दौरान मायके नही जाते ,,, और जानू के आने के ठीक 15 दिन पहले ही उससे मिले बिना आपने रुखसती ले ली जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी ,,, जब मुझे आपसे मिलने मायके आना था ,, जब मुझे बहुत कुछ बताना था ,, जब मुझे आपसे बहुत कुछ सुनना समझना था ,   वो आज भी कहना बाकी है माँ.... , बोलों में रखा है मैने सब सम्भाल कर....मिलूँगी आपसे जब...तब बताऊंगी सब एक एक कर बस आप मुझे खाली अपने सीने से ल...