मन्नत मांगने के सबके अपने तरीके हैं। हम प्रसाद बोलते हैं, हे भोलेनाथ मनोकामना पूरी कर दो सवा रूपये ( अब तो रेट बढ़ गए हैं महंगाई के साथ) का प्रसाद चढ़ायेंगे। मजार, मन्दिर व पेड़ों पर भी मन्नतों के धागे बाँधे जाते हैं। विदेशों में देखा पुलों पर मन्नतों के ताले बाँधते हैं लोग। उन तालों पर कई बार प्रेमी युगल के दिल और नाम अंकित होते हैं । कई बार बच्चों की सूदर या कोई वस्तु साथ में लॉक कर चाबी नीचे नदी में फेंक देते हैं। कैसा विश्वास है कि नदी अपने हृदय में सब संजो लेगी और पुल के साथ प्रार्थना करेगी। नदी के दो किनारे जो कभी नहीं मिलते, परन्तु उनको जोड़ देता है एक पुल।ये कैसा अजीब सा रिश्ता है प्यार का कि एक दूसरे से अनजान, कई बार तो अलग-अलग देशों व संस्कृतियों के लोग एक हो जाते हैं, जन्म- जन्मान्तरों तक साथ निभाने की कसमें खाते हैं ।ज़्यादातर ये ताले दो प्रेमी ही लगाते हैं। कई बार इन लव- लॉक्स का वजन इतना ज़्यादा हो जाता है कि इनमें से कई तालों को तोड़कर हटाना पड़ता है। दो इंसानों की परिस्थितियाँ चाहें कितनी ही विकट या विपरीत हों, प्यार दो दिलों पर पुल बना कर उनको एक कर देता है और भाव...
पूजा अनिल के दिए टास्क में सबने अपनी माँ को पत्र लिखा और खूब याद किया , सबके पत्र पढ़ते पढ़ते खूब बार आँखें भर आई। माँ जैसा कोई नहीं , आप भी पढ़िए - माँ तो है माँ ...... मेरी भोली माँ बहुत सारे वाले प्यार के साथ आपको ढेर सारी जफ्फियां ## मेरी शादी के डेढ़ साल बाद ही मुझे घर से रुख्सत कर तुम जहां से रुख्सत हो ली ,, होली के ठीक एक सप्ताह बाद ,.... ये कैसी विदाई थी माँ ? औऱ मेरे लिए तो इस डेड साल के भी 9 महीने ही मिले क्योंकि जानू की प्रेग्नेंसी के चलते , ससुराल की उस परम्परा का निर्वाह भी तो किया कि इस दौरान मायके नही जाते ,,, और जानू के आने के ठीक 15 दिन पहले ही उससे मिले बिना आपने रुखसती ले ली जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी ,,, जब मुझे आपसे मिलने मायके आना था ,, जब मुझे बहुत कुछ बताना था ,, जब मुझे आपसे बहुत कुछ सुनना समझना था , वो आज भी कहना बाकी है माँ.... , बोलों में रखा है मैने सब सम्भाल कर....मिलूँगी आपसे जब...तब बताऊंगी सब एक एक कर बस आप मुझे खाली अपने सीने से ल...
3अप्रैल को ग्रुप "गाओ गुनगुनाओ शौक से" की वर्षगांठ थी। सुबह से मन था कि कुछ अलग करें ,और ये खास तरह की सेल्फी ली गई। इस भगमभाग भरी दुनिया में एक पल ठहरकर हँसने हँसाने के लिए, आईए आप भी दो पल रुके , हँसे हमारे साथ (इस खास तरह की सेल्फी के लिए थोड़ा मुंह खोलें और मुस्कान को बढ़ाते हुए होठों के किनारों को ज्यादा से ज्यादा कान के पास ले जाने की कोशिश करें ।आँखें इस प्रयास में बंद हों तो भी चलेंगी 😂)। इस तरह पहली सेल्फी लेकर ग्रुप पर भेजी और कहा इस तरह की फोटो चाहिए और देखिए एक दूसरे के लिए जान निछावर करने वाली सखियों ने क्या किया । नोट - जो लोग बाकि बचे उनके फोटो मिलने पर पोस्ट कर दिए जाएंगे। अर्चना चावजी रश्मिप्रभ दी की दो फोटो रिजेक्ट की गई,फिर ये निकली। आराधना और मीठी किट्टी व्यस्त थी शायद फिर भी मीठी के साथ रविवार मन गया हमारा। रचना बजाज रचना परसों ही राजकोट शिफ्ट हुई ast व्यस्त पड़े सामान के बीच ये पल निकाल ही लिया। गिरिजा कुलश्रेष्ठ गिरिजा जी ने तुरंत पहले शॉट में पकड़ ली मुस्कान। रश्मि कुच्चल रश्मि ...
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